Happy Holi 2019

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Holi History in hindi

Holi History in hindi

Holi History in hindi – Holi festival india mai popular festival hai . Agar aapko bhi janna hai holi festival ki history in hindi language .Ye article aapke sare sawal ka jawab dega jaise holi kab hai, holi kyun manate hai , holi kaise manate hai etc.

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Holi History in hindi

Holi History in hindi

होली का उत्सव फागुन की पूर्णिमा को मनाया जाता है। होली से आठ दिन पहले होलाष्टक प्रारंभ होते हैं। होलाष्टक के दिनों में कोई भी शुभ कार्य करना अच्छा नहीं माना जाता।

अन्य भारतीय उत्सवों की तरह होली के साथ भी विभिन्न पौराणिक कथाएं जुड़ी हुई हैं। यहाँ विभिन्न कथाओं को उद्धृत किया गया है।

नि:संदेह भारतीय व्रत एवं त्योहार हमारी सांस्कृतिक धरोहर है। हमारे सभी व्रत-त्योहार चाहे वह करवाचौथ का व्रत हो या दिवाली पर्व, कहीं न कहीं वे पौराणिक पृष्ठभूमि से जुड़े हुए हैं और उनका वैज्ञानिक पक्ष भी नकारा नहीं जा सकता। हमारा भरसक प्रयास रहेगा कि हम इन पन्नों में अधिक से अधिक भारतीय पर्वों व उपवासों का समावेश कर सकें।

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होली का त्योहार क्यों मनाते हैं?

होली का इतिहास

हिरण्यकश्यप प्राचीन भारत का एक राजा था जो कि राक्षस की तरह था। वह अपने छोटे भाई की मौत का बदला लेना चाहता था जिसे भगवान विष्णु ने मारा था। इसलिए अपने आप को शक्तिशाली बनाने के लिए उसने सालों तक प्रार्थना की। आखिरकार उसे वरदान मिला। लेकिन इससे हिरण्यकश्यप खुद को भगवान समझने लगा और लोगों से खुद की भगवान की तरह पूजा करने को कहने लगा। इस दुष्ट राजा का एक बेटा था जिसका नाम प्रहलाद था और वह भगवान विष्णु का परम भक्त था। प्रहलाद ने अपने पिता का कहना कभी नहीं माना और वह भगवान विष्णु की पूजा करता रहा। बेटे द्वारा अपनी पूजा ना करने से नाराज उस राजा ने अपने बेटे को मारने का निर्णय किया। उसने अपनी बहन होलिका से कहा कि वो प्रहलाद को गोद में लेकर आग में बैठ जाए क्योंकि होलिका आग में जल नहीं सकती थी। उनकी योजना प्रहलाद को जलाने की थी, लेकिन उनकी योजना सफल नहीं हो सकी क्योंकि प्रहलाद सारा समय भगवान विष्णु का नाम लेता रहा और बच गया पर होलिका जलकर राख हो गई। होलिका की ये हार बुराई के नष्ट होने का प्रतीक है। इसके बाद भगवान विष्णु ने हिरण्यकश्यप का वध कर दिया, इसलिए होली का त्योहार, होलिका की मौत की कहानी से जुड़ा हुआ है। इसके चलते भारत के कुछ राज्यों में होली से एक दिन पहले बुराई के अंत के प्रतीक के तौर पर होली जलाई जाती है।

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होली की शुरुआत कैसे हुई – Holi origin and history in Hindi

भारतीय त्योहारों में जब होली की बात आती है तो होली के इतिहास में पुराणों में इसकी जानकारी प्राप्त होती है होली की पारंपरिक विधि और होली के इतिहास को लेकर मिथकों की एक विस्तृत श्रंखला मौजूद है जिसमें कई हिंदू देवी देवताओं के नाम जुड़े हुए हैं।

प्रसिद्ध संस्कृत व्याकरण कर्ता दंडिन और रत्नावली से जुड़े संस्कृत गद्य दसकुमार चरित्र मैं सातवीं शताब्दी में लिखे गए एक संस्कृत नाटक में होली का वर्णन मिलता है प्रसिद्ध शास्त्रीय संस्कृत लेखक और कवि कालिदास जी ने चंद्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल के दौरान चौथी सदी के आसपास इस त्यौहार का उल्लेख किया है।

होली का महत्व – importance of holi in Hindi

होली का त्यौहार होलीका दहन के 1 दिन बाद मनाया जाता है और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है यह त्यौहार स्वयं को सभी आंतरिक बुराइयों और पिछले पापों से छुटकारा पाने का एक प्रतीक है यह एक ऐसा समय होता है जब लोग एक दूसरे से मिलते हैं पुराने विवाद संघर्षों को दूर करते हैं साथ ही साथ अपने जीवन को फिर से नए तरीके से शुरु करते हैं

भगवान कृष्ण की भूमि ब्रज भूमि में होली को राधा और भगवान कृष्ण के अनंत प्रेम की स्मृति में 16 दिनों तक मनाया जाता है यह त्यौहार जो कि आखरी पूर्णिमा या हिंदू कैलेंडर के महीने फाल्गुन की पूर्णिमा में मनाया जाता है जो कि ग्रेगोरियन कैलेंडर में फरवरी-मार्च में आता है यह त्यौहार सर्दियों के मौसम का अंत और बसंत की शुरुआत का प्रतीक भी माना जाता है

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